बरेली:
स्पाइनल ट्यूबरकुलोसिस (रीढ़ की हड्डी का टीबी) एक प्रकार का तपेदिक है जो मुख्य
रूप से रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है। यह मायकॉबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक
बैक्टीरिया के कारण होता है,
जो फेफड़ों के टीबी के लिए जिम्मेदार वही रोगजनक है।
इस स्थिति में
बैक्टीरिया फेफड़ों या शरीर के अन्य हिस्सों से रक्त प्रवाह के माध्यम से रीढ़ तक
पहुँचते हैं। इससे धीरे-धीरे रीढ़ की हड्डियों (वर्टेब्राए) का क्षय होता है, जिससे गंभीर
पीठ दर्द, अकड़न
और विकृति हो सकती है। यदि समय पर उपचार न किया जाए, तो स्पाइनल टीबी गंभीर जटिलताओं जैसे रीढ़ की अस्थिरता, तंत्रिका तंत्र
संबंधी समस्याएं और यहां तक कि पैरालिसिस तक का कारण बन सकती है। इसलिए शुरुआती
निदान और उपचार बेहद महत्वपूर्ण हैं।
मैक्स
सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल,
साकेत के न्यूरोसर्जरी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ.
वीरेंद्र गुप्ता ने बताया “स्पाइनल टीबी के कई प्रकार हैं, जो संक्रमण के
स्थान और फैलाव के आधार पर अलग किए जाते हैं। पाराडिस्कल टीबी सबसे आम प्रकार है, जिसमें संक्रमण
इंटरवर्टेब्रल डिस्क के पास के वर्टेब्रल बॉडी को प्रभावित करता है और धीरे-धीरे
डिस्क स्पेस का संकुचन व वर्टेब्रल कॉलैप्स करता है। सेंट्रल टीबी में संक्रमण
वर्टेब्रल बॉडी के मध्य भाग से शुरू होता है और इससे वर्टेब्रा प्लाना जैसी स्थिति
उत्पन्न हो सकती है, जिससे
रीढ़ में अस्थिरता और विकृति हो सकती है। एंटीरियर या सब-लिगामेंटस टीबी वर्टेब्रल
बॉडी के आगे के हिस्से और एंटीरियर लोंगिट्यूडिनल लिगामेंट के नीचे फैलती है, जो कई
वर्टेब्रल को प्रभावित कर बड़ी एब्सेस और विकृतियों का कारण बन सकती है।
पोस्टेरियर टीबी कम आम है और इसमें रीढ़ के पीछे के हिस्से जैसे पेडिकल्स, लैमिना और
स्पाइनस प्रोसेस प्रभावित होते हैं,
जिससे रीढ़ की नसों पर दबाव और न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं हो सकती हैं। कभी-कभी
स्पाइनल टीबी नॉन-कॉंटिग्यूस (स्किप) लेशन्स के रूप में भी दिखाई देती है, जिसमें रीढ़ के
कई असंबंधित हिस्से संक्रमित हो जाते हैं,
जिससे निदान और उपचार जटिल हो जाता है।
स्पाइनल टीबी
के लक्षण संक्रमण के चरण और गंभीरता पर निर्भर करते हैं। आमतौर पर लगातार और गहरे
पीठ दर्द के साथ शुरुआत होती है,
जो कभी-कभी शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है। मरीजों को अकड़न और
गतिशीलता में कमी का अनुभव होता है,
विशेषकर सुबह या निष्क्रियता के बाद।
इसके साथ हल्का बुखार, रात को पसीना आना, भूख में कमी और वजन घटना जैसे सामान्य टीबी के लक्षण भी हो सकते हैं। यदि संक्रमण रीढ़ की हड्डी या नसों को प्रभावित करता है, तो सुन्नपन, झुनझुनी, हाथ-पैरों में कमजोरी या पैरालिसिस भी हो सकती है। उन्नत मामलों में वर्टेब्रल कॉलैप्स के कारण रीढ़ में विकृति (काइफोसिस) और अस्थिरता हो सकती है। कभी-कभी रीढ़ के पास एब्सेस बन सकते हैं, जिससे पीठ में सूजन या संवेदनशीलता दिखाई देती है। इसलिए शुरुआती पहचान और समय पर उपचार लक्षणों को नियंत्रित करने और दीर्घकालिक जटिलताओं को रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं।

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